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55 ClubPachpan Number Wali Bench

CHAPTER 1

Bench Number 55

एक बेंच जहाँ हर शाम कहानी शुरू होती थी।

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सिटी पार्क की बेंच नंबर 55 बाकी बेंचों जैसी ही थी, लेकिन शाम पाँच बजे वहाँ हमेशा वही पाँच बुजुर्ग बैठते— शर्मा जी, फातिमा आंटी, जोसेफ अंकल, लीला दीदी और हरीश जी। पास के स्कूल के बच्चे उन्हें मज़ाक में “55 Club” कहने लगे।

एक दिन स्कूल की छात्रा आरोही बारिश से बचने के लिए उसी शेड में रुक गई। उसने देखा कि पाँचों पुराने अखबार से मोहल्ले की समस्याओं की सूची बना रहे थे— टूटी स्ट्रीट लाइट, खाली सामुदायिक कमरा, बच्चों के लिए पढ़ने की जगह नहीं।

आरोही ने कहा कि स्कूल में कई पुरानी किताबें हैं जो इस्तेमाल नहीं होतीं। फातिमा आंटी ने तुरंत पूछा, “तो क्या हम बेंच से बड़ी जगह बना सकते हैं?” इसी सवाल से 55 Club का नया अध्याय शुरू हुआ।

Chapter 1 of 8