CHAPTER 3
Kahani Ki Shaam
जब बच्चों ने सुना और बुजुर्गों ने याद किया।
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पहली गतिविधि “कहानी की शाम” थी। जोसेफ अंकल ने अपने बचपन की ट्रेन यात्रा सुनाई, लीला दीदी ने गाँव के मेले की कहानी और बच्चों ने आधुनिक कॉमिक्स से पसंदीदा दृश्य बताए।
आरोही ने देखा कि कई बुजुर्गों की यादें रिकॉर्ड करने लायक हैं। उसने मोबाइल से ऑडियो रिकॉर्ड करना शुरू किया, अनुमति लेकर। स्कूल के कंप्यूटर शिक्षक ने बच्चों को ऑडियो संपादन सिखाया।
कुछ ही हफ्तों में “हमारे मोहल्ले की आवाज़ें” नाम की डिजिटल संग्रह बन गई। लोगों ने महसूस किया कि सामुदायिक कमरा सिर्फ किताब पढ़ने की जगह नहीं, यादें बचाने की जगह भी है।