CHAPTER 8
Club Phir Zinda
एक बंद कमरे से खुली नई सोच।
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विज्ञान प्रदर्शनी के दिन कमरे 91 के बाहर सबसे लंबी कतार थी। बच्चे छोटे रोबोट, पौधों के प्रयोग, पानी बचाने के मॉडल और मौसम स्टेशन देख रहे थे। हर प्रोजेक्ट के पास एक कार्ड था— “हमारा सवाल क्या था?”
आरुष ने महसूस किया कि रहस्य का सबसे अच्छा हिस्सा छिपा बक्सा या पुराना टेप नहीं था। असली खोज यह थी कि पुराने छात्रों की जिज्ञासा नई पीढ़ी तक पहुँच गई। मिश्रा सर ने कमरे की चाबी चारों को नहीं दी; उन्होंने उसे दीवार पर एक सुरक्षित बॉक्स में रखा ताकि हर अधिकृत टीम इस्तेमाल कर सके।
रात 9:10 पर चारों आखिरी बार कमरे में बैठे। पुरानी घंटी फिर बजी, इस बार उन्होंने खुद टाइमर लगाया था। दीया ने हँसकर कहा, “अब कोई तीस साल बाद हमारे नोट ढूँढेगा?” सना ने जवाब दिया, “अगर हम अच्छे सवाल छोड़ गए, तो जरूर।”