CHAPTER 4
Pehla Mahina
छोटे बदलाव और साफ हिसाब।
Approx. 1 min read
राजा और उसकी बहन ने दुकान का नया बोर्ड बनाया। स्कूल के बच्चों के लिए प्रोजेक्ट कॉर्नर, प्रिंट/स्कैन सेवा और पहले से तैयार छोटी स्टेशनरी किट रखी गई। हर बिक्री और खर्च का दैनिक हिसाब बनाया गया।
पहले सप्ताह कोई बड़ा चमत्कार नहीं हुआ। राजा निराश होकर बोला, “लक नहीं चल रहा।” पिता ने नोटबुक दिखाकर कहा, “दादा एक दिन का हिसाब देखकर फैसला नहीं करते थे।”
दूसरे सप्ताह स्कूल में प्रोजेक्ट जमा होने थे और दुकान पर भीड़ बढ़ी। राजा ने देखा कि पहले से तैयारी ने उन्हें मौका पकड़ने दिया। अगर सामग्री उपलब्ध न होती तो वही ग्राहक लौट जाते। किस्मत जैसी दिखने वाली बात के पीछे तैयारी थी।