CHAPTER 3
Kamra Khula
धूल के भीतर बचा एक छोटा प्रयोगशाला संसार।
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दरवाज़ा खोलते ही पुराने पोस्टर, तार, रेडियो सेट और लकड़ी की मेज़ें दिखाई दीं। दीवार पर बड़े अक्षरों में लिखा था— “गलत उत्तर से मत डरो, सवाल न पूछने से डरो।” चारों को कमरा किसी समय बहुत जीवंत रहा होगा।
एक मेज़ के नीचे ताले वाला धातु का बक्सा था। लाइब्रेरी से मिली चाबी उसमें फिट हुई। बक्से में छोटे मौसम सेंसर, पुराने फोटो और एक टेप रिकॉर्डर था। फोटो में मिश्रा सर भी छात्र के रूप में खड़े थे। उन्होंने स्वीकार किया कि वे क्लब के सदस्य थे।
टेप में उनके दोस्त निखिल की आवाज़ थी। वह कह रहा था कि उन्होंने पहाड़ी पर छोटे मौसम स्टेशन का प्रयोग शुरू किया था, लेकिन अंतिम डेटा कभी स्कूल तक नहीं पहुँचा। आखिरी वाक्य था— “अगर स्टेशन अभी भी वहाँ है, तो लाल पत्थर के नीचे दूसरा रिकॉर्ड मिलेगा।” चारों के सामने नया लक्ष्य था: स्कूल के पीछे वाली पहाड़ी।