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91 ClubKamra Number 91

CHAPTER 2

Nau Bajkar Das Minute

समय से जुड़ा पहला संकेत।

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स्कूल के रिकॉर्ड में कमरे की चाबी नहीं मिली। पुराने लैब सहायक मिश्रा सर ने बताया कि तीस साल पहले कुछ छात्र रात को विज्ञान प्रयोग करते थे और उनका समूह “91 Club” कहलाता था। 9:10 उनका तय बैठक समय था, क्योंकि हॉस्टल की अंतिम घंटी नौ बजे और लाइट बंद साढ़े नौ बजे होती थी।

मिश्रा सर ने एक पुरानी नोटबुक दी। उसमें तारों की स्थिति, मौसम के रिकॉर्ड और छोटे रेडियो प्रयोग लिखे थे। आखिरी पन्ने पर एक समीकरण अधूरा था और नीचे निर्देश— “उत्तर लाइब्रेरी की 91वीं पुस्तक में।”

चारों ने लाइब्रेरी में पुरानी सूची खोजी। 91वीं पुस्तक खगोल विज्ञान की थी। उसके कवर के भीतर एक पतली चाबी चिपकी थी। चाबी कमरे 91 की नहीं, बल्कि कमरे के अंदर रखे किसी छोटे ताले की लग रही थी। अब उन्हें मुख्य दरवाज़ा खोलने की अनुमति चाहिए थी। प्रिंसिपल ने शर्त रखी— शिक्षक के साथ ही जाना होगा। मिश्रा सर मुस्कराए, “इतने साल बाद क्लब फिर खुलने वाला है।”

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