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Jai ClubMaidan Bachane Wale Dost

CHAPTER 1

Sunday Ka Maidan

जहाँ हर उम्र के लोग मिलते थे।

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जय नगर का छोटा मैदान किसी स्टेडियम जैसा नहीं था। एक तरफ टूटा गोलपोस्ट, दूसरी तरफ नीम का पेड़ और कोने में बुजुर्गों की बेंच। फिर भी रविवार की सुबह वहाँ क्रिकेट, बैडमिंटन, दौड़ और बच्चों की हँसी एक साथ सुनाई देती थी।

आठ दोस्तों ने वर्षों पहले मज़ाक में अपने समूह का नाम “Jai Club” रखा था। वे हर हफ्ते मैदान साफ करते और छोटे बच्चों के मैच कराते। एक सुबह फाटक पर नोटिस लगा मिला— “भूमि पर पार्किंग कॉम्प्लेक्स प्रस्तावित।”

सब नाराज़ हुए। कुछ ने तुरंत विरोध प्रदर्शन की बात की, लेकिन क्लब की सबसे शांत सदस्य रुही ने कहा, “पहले पता करते हैं कि फैसला क्यों हुआ।” उन्होंने नगर कार्यालय से योजना की प्रति माँगी। दस्तावेज़ में लिखा था कि मैदान “कम उपयोग में आने वाली खाली भूमि” है। दोस्त हँसे भी और दुखी भी हुए— जिस जगह रोज़ इतने लोग आते हैं, वह कागज़ पर खाली थी।

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