CHAPTER 2
Khali Zameen Ka Sach
कागज़ और असल जिंदगी के बीच का अंतर।
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Jai Club ने एक सप्ताह मैदान का उपयोग दर्ज किया। सुबह बुजुर्ग चलते थे, दोपहर स्कूल के बच्चे अभ्यास करते, शाम महिलाओं का फिटनेस समूह आता और रात तक युवा खेलते। कुल मिलाकर रोज़ सैकड़ों लोग मैदान इस्तेमाल करते थे।
उन्होंने फोटो, समय और लोगों की संख्या के साथ रिपोर्ट बनाई। साथ ही पता चला कि पार्किंग की जरूरत भी वास्तविक थी; पास के बाजार में वाहन सड़क रोकते थे। अगर वे सिर्फ “नहीं” कहते, तो समस्या का दूसरा हिस्सा अनसुना रह जाता।
रुही ने सुझाव दिया कि खाली पड़ी पुरानी बस डिपो की जमीन पार्किंग के लिए बेहतर हो सकती है। क्लब ने नक्शा बनाकर दूरी, सड़क पहुँच और लागत की जानकारी जुटाई। उनका लक्ष्य विरोध जीतना नहीं, बेहतर विकल्प देना था। नगर अधिकारी पहली बार उनकी बात गंभीरता से सुनने लगे।