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Kavya ClubEk Adhoori Diary

CHAPTER 6

Aakhri Panna

Ek chhupa hua panna, ek purani galti aur kahani ka sach.

Approx. 2 min read

डायरी के पिछले कवर को तारा ने रोशनी में देखा तो उसे कागज़ की दो परतों के बीच कुछ दबा हुआ दिखा। किनारे को सावधानी से खोलने पर एक पतला मुड़ा हुआ पन्ना बाहर आया। ऊपर काव्या की लिखावट थी— “अंत पढ़ने वाले के लिए।”

उसमें लिखा था कि सच्चाई सिर्फ किसी को दोषी साबित करने के लिए नहीं होती; कभी-कभी सच्चाई किसी निर्दोष व्यक्ति को उसकी खोई हुई इज़्ज़त लौटाने के लिए जरूरी होती है। काव्या ने बताया था कि नील ने रिकॉर्डिंग बचाई, मीरा ने तस्वीर छिपाई और उसने डायरी लिखी। वे चाहते थे कि भविष्य में कोई बड़ा होकर उनकी बात सुने।

आरव ने नाना से फोन पर बात की। लंबे मौन के बाद नाना ने सब स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि वे जीवन भर इस बात से दुखी रहे कि उस समय समर के लिए कुछ नहीं कर सके। डर, परिवार का दबाव और उम्र— इन सबने चार दोस्तों को अलग कर दिया।

कुछ दिनों बाद नाना शहर आए। पुराने पुस्तकालय में एक छोटी बैठक हुई। समर का पता भी वर्षों की खोज के बाद मिल गया था। वह अब दूसरे राज्य में शिक्षक था। जब उसे रिकॉर्डिंग और डायरी की प्रतियाँ भेजी गईं, उसका जवाब सिर्फ एक लाइन का था— “मुझे दोषी न मानने वाले चार लोग थे; आज इतने साल बाद पाँचवाँ भी मिल गया।”

आरव ने डायरी के आखिरी खाली हिस्से में अपनी तरफ से एक पंक्ति लिखी— “कहानी पूरी हुई, लेकिन काव्या क्लब खत्म नहीं हुआ।”

उसने डायरी बंद की, सूखा फूल वापस पहले पन्ने में रखा और बाहर बरामदे में आ गया। बारिश रुक चुकी थी। बादलों के बीच से धूप निकल रही थी— जैसे किसी बहुत पुराने सच को आखिरकार खुली हवा मिल गई हो।

Chapter 6 of 6