CHAPTER 5
Sach Ke Kareeb
Purani recording batati hai ki us raat asal me kya hua tha.
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आरव और तारा वापस घर पहुँचे तो डायरी का हर वाक्य नई तरह से समझ आने लगा। स्कूल की आग, समर पर लगा आरोप और दोस्तों की गवाही— शायद यही वह सच था जिसे किसी ने दबा दिया था।
डायरी के आखिरी सुरक्षित पन्नों में काव्या ने लिखा था कि उन्होंने आग लगते समय एक शिक्षक को स्टोर रूम से निकलते देखा था। अंदर पुराने रिकॉर्ड जलाए जा रहे थे। समर सबसे पहले धुआँ देखकर पहुँचा और आग बुझाने की कोशिश की, लेकिन लोगों ने उसे वहीं देखकर दोषी मान लिया।
चारों दोस्तों ने सच बताने की कोशिश की। मगर स्कूल प्रबंधन ने बच्चों की बात को “कल्पना” कहकर दबा दिया। समर के परिवार को शहर छोड़ना पड़ा। उसके बाद काव्या ने सारे सबूत अलग-अलग जगह छिपा दिए ताकि कभी कोई कहानी पूरी कर सके।
आरव के हाथ काँप रहे थे। डायरी के आखिरी पन्ने से पहले एक छोटी जेब बनी थी। उसमें एक पुरानी कैसेट की सूची और एक पता था। वही कैसेट पश्चिम वाले कमरे में मिली थीं। तारा ने पास की दुकान से पुराना कैसेट प्लेयर जुटाया।
आवाज़ बहुत धीमी थी, लेकिन साफ सुनाई दिया— बच्चों की आवाजें, फिर एक आदमी की घबराई हुई बातचीत: “रिकॉर्ड बाहर नहीं जाने चाहिए… दरवाज़ा बंद करो।” उसके बाद खाँसी, शोर और किसी बच्चे की आवाज़— “समर, पीछे हटो!”
यह कोई कहानी नहीं थी। यह उस रात की वास्तविक रिकॉर्डिंग थी। अब सिर्फ एक सवाल बचा था— काव्या ने अंतिम पन्ने में क्या लिखा था, और वह पन्ना कहाँ था?