CHAPTER 8
Roshni Phir Lauti
लाइब्रेरी का नया दिन और एक पुराना नाम।
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तीन महीने बाद उद्घाटन के दिन लाइब्रेरी के बाहर लंबी कतार थी। बच्चों के हाथ में नए कार्ड थे और अंदर हर शेल्फ़ पर साफ लेबल। पुराने घंटाघर की मशीन भी ठीक कर दी गई थी। ठीक छह बजे घंटी बजी तो पूरा हॉल तालियों से भर गया।
मीरा ने प्रवेश के पास नया बोर्ड लगाया— “Kavya Club Library — Shreewin Reading Room।” नीचे श्रीविनायक जोशी की तस्वीर और उनका वाक्य लिखा था। नाना की आँखें नम हो गईं। उन्होंने कहा, “तुमने सिर्फ इमारत नहीं बचाई, शहर को उसका एक हिस्सा वापस दिया है।”
मीरा ने वही नीली मुहर नए सदस्य कार्ड पर लगाई। पहली सदस्य एक छोटी लड़की बनी जिसने पूछा, “दीदी, यहाँ की सबसे अच्छी कहानी कौन-सी है?” मीरा ने मुस्कराकर कहा, “शायद वही जो अभी लिखी जा रही है।” बाहर शाम की रोशनी खिड़कियों से अंदर आ रही थी और वर्षों बाद लाइब्रेरी का दरवाज़ा बंद होने के लिए नहीं, लोगों के आने के लिए खुला था।