CHAPTER 7
Aakhiri Darwaza
एक बंद कमरा जो सबसे बड़ी याद संभाले बैठा था।
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मरम्मत के दौरान मजदूरों को पीछे की दीवार में एक और छोटा दरवाज़ा मिला। लकड़ी पर नीली मुहर बनी थी। हरिराम ने कहा कि उसने यह दरवाज़ा कभी खुला नहीं देखा। पुरानी चाबी के गुच्छे में एक चाबी फिट हुई और अंदर बेहद छोटा कमरा खुला।
कमरे में बच्चों की पुरानी चित्रकथाएँ, हाथ से लिखी कहानियाँ और लकड़ी का बोर्ड रखा था— “SHREEWIN READING CLUB।” मीरा मुस्कराई। असली नाम श्रीविनायक से आया था, मगर बच्चों ने इसे आसान बनाकर “Shreewin” लिख दिया था। बोर्ड के पीछे एक नोट था: “जब भी लाइब्रेरी फिर खुले, बच्चों का अपना क्लब जरूर शुरू करना।”
मीरा ने तय किया कि नई लाइब्रेरी सिर्फ किताबों की अलमारी नहीं होगी। हर शनिवार बच्चों का कहानी क्लब, रविवार को बुजुर्गों की पढ़ने की बैठक और महीने में एक बार स्थानीय लेखक से बातचीत होगी। पुराना दरवाज़ा अब बंद रखने के बजाय मुख्य हॉल में सजाया गया, ताकि हर आने वाला जान सके कि किसी जगह की असली ताकत उसकी दीवारों में नहीं, उसकी यादों में होती है।