CHAPTER 2
Pehla Adhoora Panna
Diary ke shabdon me chhupa pehla sach.
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अगली सुबह आरव डायरी लेकर बरामदे में बैठा। उसने हर पन्ने को ध्यान से पढ़ना शुरू किया। शुरुआत में चार दोस्तों की छोटी-छोटी बातें थीं— स्कूल के बाद नदी किनारे मिलना, कविताएँ लिखना और एक-दूसरे के लिए कहानियाँ बनाना। वे अपने समूह को “काव्या क्लब” कहते थे।
धीरे-धीरे डायरी का लहजा बदलने लगा। एक जगह मीरा की लिखावट में लिखा था कि क्लब के चारों सदस्यों ने एक ऐसा सच देखा था जिसे घर के बड़े लोग छिपाना चाहते थे। लेकिन किस सच की बात थी, इसका जिक्र नहीं था।
आरव को बीच में एक पन्ना मिला जिसका आधा हिस्सा गायब था। बची हुई पंक्तियों में लिखा था, “नील ने कहा है कि पुरानी चाबी संभाल कर रखना। पश्चिम वाले कमरे का दरवाज़ा बाहर से बंद है, लेकिन असली ताला अंदर है…” नीचे एक नक्शे जैसी रेखा बनी थी और उसके पास एक छोटा वृत्त।
उसे तुरंत संदूक में मिली पीतल की चाबी याद आई। उसने पूरे घर का चक्कर लगाया। पश्चिम की तरफ वही कमरा था जिसके दरवाज़े पर मोटा लकड़ी का पटरा लगा था। नाना ने बचपन में कई बार कहा था कि उस कमरे में पुराने टूटे सामान के अलावा कुछ नहीं है।
आरव ने चाबी जेब में रखी और तय किया कि शाम होने से पहले वह उस कमरे को जरूर खोलेगा। लेकिन उसके मन में एक सवाल लगातार घूम रहा था— अगर यह सब सिर्फ पुरानी बच्चों की कहानी थी, तो पन्ना किसने फाड़ा?