CHAPTER 2
Neeli Mohar Wala Khat
तीसरी शेल्फ़ के पीछे छिपा पहला संकेत।
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तीसरी शेल्फ़ के पीछे एक पतला लिफाफा दबा था। उस पर पच्चीस साल पुरानी तारीख और नीली मुहर लगी थी। अंदर नगर परिषद के नाम लिखा एक पत्र था। पत्र में एक व्यापारी परिवार ने लाइब्रेरी की जमीन शहर को दान करते हुए शर्त रखी थी कि इस जगह का उपयोग हमेशा पढ़ाई, पुस्तकालय या सार्वजनिक शिक्षा के लिए ही होगा।
मीरा ने पत्र नाना को दिखाया। नाना ने तुरंत पहचान लिया कि हस्ताक्षर शहर के पुराने शिक्षक श्रीविनायक जोशी के थे, जिन्हें बच्चे प्यार से “श्री विन” कहते थे। शायद उसी नाम से लाइब्रेरी के पुराने बच्चों ने एक पठन समूह बनाया था। लेकिन नगर परिषद की नई फाइलों में इस दान की शर्त का कोई ज़िक्र नहीं था।
हरिराम ने बताया कि कुछ साल पहले रिकॉर्ड रूम में पानी भर गया था और कई दस्तावेज़ गायब हो गए। मगर पुराने पुस्तकालय रजिस्टर में हर दान, हर बैठक और हर मरम्मत का रिकॉर्ड रहता था। समस्या यह थी कि मुख्य रजिस्टर भी गायब था। पत्र के नीचे एक और पंक्ति थी— “रजिस्टर वहाँ नहीं जहाँ किताबें हैं, वहाँ है जहाँ आवाज़ हर शाम लौटती है।” मीरा ने खिड़की से बाहर देखा। सामने पुराना घंटाघर था।