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ShreewinPurani Library Ka Aakhiri Darwaza

CHAPTER 3

Teesri Almari

किताबों के बीच नहीं, शहर की आवाज़ में छिपा रास्ता।

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मीरा घंटाघर पहुँची तो वहाँ केवल कबूतर और टूटे हुए घड़ी के पुर्ज़े थे। शाम छह बजे भी घंटी नहीं बजती थी, क्योंकि मशीन वर्षों पहले बंद हो चुकी थी। फिर भी उसे “जहाँ आवाज़ लौटती है” वाली पंक्ति याद थी। उसने दीवारों पर थपथपाकर देखा। एक कोना बाकी हिस्से से खोखला सुनाई दिया।

पत्थर की पतली पट्टी हटाने पर एक छोटी धातु की डिब्बी मिली। उसमें रजिस्टर नहीं, बल्कि लाइब्रेरी की तीसरी अलमारी की एक पुरानी तस्वीर और पीछे लिखे चार नंबर थे— 3, 5, 2, 1। तस्वीर में अलमारी के नीचे चार छोटे दराज़ दिख रहे थे, जो आज धूल और लकड़ी की पट्टियों से छिपे हुए थे।

मीरा वापस लाइब्रेरी आई। नंबरों के क्रम से दराज़ खोलने पर नीचे की लकड़ी ढीली हो गई। उसके भीतर पुराने अखबारों का बंडल और एक नक्शा मिला। नक्शे में लाइब्रेरी के नीचे छोटे स्टोर रूम का रास्ता था, जिसका प्रवेश कई साल पहले बंद कर दिया गया था। नाना ने कहा, “वहीं शायद असली रिकॉर्ड बचा हो।” लेकिन रास्ता खोलने से पहले उन्हें नगर परिषद से अनुमति चाहिए थी। मीरा ने तय किया कि अब वह सिर्फ खोज नहीं करेगी— वह लाइब्रेरी बचाने के लिए लोगों को भी साथ लाएगी।

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