CHAPTER 4
Raat Ki Ghanti
बंद घंटाघर में अचानक बजती एक आवाज़।
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मीरा ने सोशल मीडिया और मोहल्ले के बच्चों की मदद से “लाइब्रेरी वापस खोलो” अभियान शुरू किया। शाम तक दर्जनों लोग पुराने फाटक के बाहर जमा हो गए। किसी ने अपनी पहली पढ़ी किताब की कहानी सुनाई, किसी ने पुरानी तस्वीरें लाकर दिखाईं। नगर परिषद को मजबूर होकर निरीक्षण की तारीख देनी पड़ी।
उसी रात मीरा घर लौट रही थी कि अचानक घंटाघर से एक बार घंटी की आवाज़ आई। वह चौंककर ऊपर देखने लगी। बंद मशीन अपने आप कैसे चल सकती थी? हरिराम भी दौड़ता हुआ आया। अंदर जाकर देखा तो पुरानी रस्सी किसी ने खींची थी, पर वहाँ कोई नहीं था। फर्श पर ताज़ा जूतों के निशान लाइब्रेरी की दिशा में जा रहे थे।
लाइब्रेरी के पीछे का छोटा दरवाज़ा खुला था। अंदर कोई रजिस्टर खोज चुका था; कागज़ बिखरे थे। मीरा को समझ आया कि वे अकेले नहीं हैं जिन्हें पुराने रिकॉर्ड की अहमियत पता है। फर्श पर एक फटा पन्ना मिला जिसमें लिखा था— “दुकान परियोजना की स्वीकृति, जमीन हस्तांतरण…” अब मामला साफ था। कोई दान की पुरानी शर्त सामने नहीं आने देना चाहता था।