CHAPTER 6
Shehar Ka Purana Vaada
जब कागज़ के साथ लोग भी गवाही देने लगे।
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नगर परिषद की खुली बैठक बुलाई गई। परियोजना के समर्थकों ने कहा कि नई दुकानें शहर की कमाई बढ़ाएँगी। मीरा ने जवाब दिया कि विकास जरूरी है, लेकिन उसके लिए शिक्षा की जमीन तोड़ना जरूरी नहीं। उसने रजिस्टर, दान पत्र और पुराने छात्रों की गवाही सामने रखी।
फिर एक-एक कर लोग खड़े होने लगे। दर्जी मास्टर ने बताया कि उन्होंने इसी लाइब्रेरी से पढ़कर हिसाब सीखा। एक नर्स ने कहा कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी उसने यहीं की थी। बच्चों ने हाथ से बनाए पोस्टर उठाए— “हमें किताबों वाला कमरा चाहिए।” मुद्दा अब सिर्फ कानूनी नहीं रहा; यह शहर की पहचान बन गया।
बैठक के अंत में परिषद ने दुकान परियोजना रोक दी और लाइब्रेरी पुनर्निर्माण का प्रस्ताव पास किया। शर्त थी कि स्थानीय लोग भी श्रम और किताबों के दान से मदद करें। मीरा ने तुरंत “श्रीविन पुस्तक मित्र” समूह बनाया। लोग दीवार रंगने, शेल्फ़ साफ करने और पुरानी किताबें सूचीबद्ध करने लगे। बंद इमारत में फिर से आवाज़ें लौटने लगीं।